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कौन है नितेश तिवारी की 'रामायण' का जटायू? रामानंद सागर की 'रामायण' में सुनील वर्मा ने निभाया था किरदार, 5 और रोल्स में भी आए नजर

 Written By: Jaya Dwivedie @JDwivedie
 Published : Jul 24, 2026 05:34 pm IST,  Updated : Jul 24, 2026 06:54 pm IST

नितेश तिवारी की 'रामायण' में अनुपम खेर 'जटायु' को अपनी आवाज देंगे। वहीं, रामानंद सागर की 'रामायण' में जटायु समेत 6 रोल निभाकर मशहूर हुए अभिनेता सुनील वर्मा आज पटना में गुमनामी की जिंदगी बिता रहे हैं।

Ramayana- India TV Hindi
रामायण का जटायू वाला सीन और अनुपम खेर। Image Source : SAGAR ARTS, ANUPAM KHER INSTA

साल 2026 की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल नितेश तिवारी की 'रामायण' लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। 23 दमदार एक्टर्स एस फिल्म में अहम रोल निभाएंगे। रणबीर कपूर (भगवान राम), साई पल्लवी (माता सीता), यश (रावण) और रवि दुबे (लक्ष्मण) जैसे दिग्गजों से सजी इस फिल्म में अब एक और बड़ा नाम जुड़ गया है। दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के आधिकारिक ऐलान के मुताबिक वरिष्ठ अभिनेता अनुपम खेर इस पौराणिक गाथा में 'जटायु' के किरदार को अपनी आवाज देंगे। इससे पहले कयास लगाए जा रहे थे कि अमिताभ बच्चन इस किरदार को आवाज दे सकते हैं, लेकिन अब अनुपम खेर के नाम पर मुहर लग चुकी है। रावण से सीता जी की रक्षा करते हुए जटायु के युद्ध का दृश्य फिल्म का बेहद भावुक और मुख्य आकर्षण होगा।

वीएफएक्स से तैयार किया जाएगा किरदार

नितेश तिवारी की आगामी फिल्म 'रामायण' में जटायु को भारी वीएफएक्स के साथ दिखाया जाएगा, जिसमें दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर इस पौराणिक पक्षी को अपनी आवाज देंगे। निर्देशक नितेश तिवारी ने संकेत दिया है कि जटायु और रावण के बीच का हवाई युद्ध पूरी फिल्म के सबसे रोमांचक विजुअल हाइलाइट्स में से एक होगा। इस दृश्य को एक सिनेमाई भव्यता देने के लिए प्रोडक्शन ऑस्कर विजेता स्टूडियो DNEG से भारी वीएफएक्स सहायता ले रहा है।

दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की पोस्ट के अनुसार, 'वरिष्ठ अभिनेता अनुपम खेर को नितेश तिवारी की 'रामायण' में जटायु की आवाज के रूप में कन्फर्म कर दिया गया है। इस घोषणा ने उन महीनों की अटकलों पर विराम लगा दिया है कि अमिताभ बच्चन इस पौराणिक पक्षी को अपनी आवाज देंगे, जो सीता को बचाते समय रावण से लड़ता है। रावण के साथ जटायु के युद्ध को फिल्म के सबसे भावनात्मक रूप से शक्तिशाली दृश्यों में से एक माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, निर्देशक नितेश तिवारी ने इस सीन को एक प्रमुख सिनेमाई पल के रूप में हाइलाइट किया है, जिसमें अनुपम खेर की आवाज इस पूजनीय किरदार को पर्दे पर जीवंत करने के लिए तैयार है।'

रामानंद सागर की 'रामायण' का वो जटायु, जिसने जीए थे 6 अलग किरदार

नितेश तिवारी की फिल्म में जटायु के आधुनिक रूपांतरण की चर्चा के बीच दूरदर्शन के उस सुनहरे दौर की यादें ताजा हो जाती हैं, जब रामानंद सागर की 'रामायण' में अभिनेता सुनील वर्मा ने जटायु का कालजयी किरदार निभाया था। बहुत कम लोग जानते हैं कि सुनील वर्मा ने केवल जटायु ही नहीं, बल्कि इस ऐतिहासिक धारावाहिक में 5 और महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं। उन्होंने इंद्रदेव से शुरुआत की थी, जिसके बाद वे गरुड़ देवता, रावण के पुत्र, च्यवन ऋषि और सुतिक्ष मुनि के रूप में भी नजर आए थे। एक ही शो में अपनी बहुमुखी प्रतिभा से 6 अलग-अलग किरदारों को जीवंत करना उनकी बेहतरीन अभिनय क्षमता का प्रमाण था।

पृथ्वी थिएटर से उमरगांव तक का सफर और जटायु बनने की चुनौतियां

सुनील वर्मा को अभिनय कला अपने पिता से विरासत में मिली थी, जिन्होंने अशोक कुमार के प्रोडक्शन की फिल्म 'बंदिनी' में काम किया था। पढ़ाई के दौरान नाटकों में सक्रिय रहने के बाद वे अपनी किस्मत आजमाने मुंबई पहुंचे और पृथ्वी थिएटर से जुड़े। यहीं उनकी मुलाकात 'रामायण' में भगवान शिव का रोल करने वाले विजय काविश से हुई, जो उन्हें रामानंद सागर के पास ले गए। उमरगांव में ऑडिशन के बाद उन्हें चुन लिया गया। हालांकि जटायु का किरदार निभाना आसान नहीं था। भारी-भरकम मुकुट और कसकर बंधे कॉस्ट्यूम के कारण वे अपनी गर्दन तक नहीं हिला पाते थे और केवल आंखों से अभिनय करते थे। लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले सुनील लहरी के अनुसार जटायु को हवा में उड़ाने के लिए उनके हाथ पंखों से बांधकर हुक के सहारे लटकाया जाता था, जो बेहद जोखिम भरा और थका देने वाला काम था।

सफलता का दौर, बड़े सितारों के साथ काम और फिर गुमनामी का साया

'रामायण' और 'उत्तर रामायण' की अपार सफलता के बाद सुनील वर्मा ने हिंदी सिनेमा और टीवी जगत में अपनी अलग जगह बनाई। उन्होंने 'टीपू सुल्तान' जैसे धारावाहिक और 'सरजमीं', 'हथियार', 'फतेह' तथा दिव्या भारती की मशहूर फिल्म 'रंग' में काम किया। इस दौरान उन्हें विनोद खन्ना, जितेंद्र, अमृता सिंह और आयशा जुल्का जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ स्क्रीन साझा करने का मौका मिला। उस दौर में प्रशंसक उन्हें देखकर आदर से पैर छूने लगते थे।

चकाचौंध से दूर: पटना में संघर्ष और आज की स्थिति

समय बदलने के साथ बड़े बैनर की फिल्मों में काम मिलना बंद हो गया और सुनील वर्मा मुख्यधारा से दूर होते चले गए। टीवी और फिल्मों की चकाचौंध से दूर आज वे बिहार की राजधानी पटना में अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं। आर्थिक तंगी और आजीविका चलाने के लिए उन्हें बी-ग्रेड प्रोजेक्ट्स और छोटे-मोटे विज्ञापनों में भी काम करना पड़ा। अपनी इस स्थिति पर खुलकर बात करते हुए उन्होंने एक बातचीत में साझा किया था कि अभिनय के इन छोटे-मोटे प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ वे अपने गुजारे के लिए एक छोटा-सा व्यवसाय भी संभाल रहे हैं।

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